सपने देखने और उनके मुक्कमल होने के बीच का रास्ता....सवाल और उनका जवाब मिलने के दरमयां ख़ामोशी के वो दो पल, सच और झूठ के बीच कभी न मिटने वाला फासला.....न होने वाला बहुत कुछ होता है पर किसी कीमत पर....शायद में, मेरे सवाल, मेरा सच और कभी न पूरी हो पाने वाली मेरी वो कविता.......उसी कलम से
Friday, 24 February 2012
woh is tarah mere saare paap dho deti hai...
maa bahut gusse mein hoti hai toh ro deti hai....!!!
amazing piece of poetry by munnawar sahab
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