सपने देखने और उनके मुक्कमल होने के बीच का रास्ता....सवाल और उनका जवाब मिलने के दरमयां ख़ामोशी के वो दो पल, सच और झूठ के बीच कभी न मिटने वाला फासला.....न होने वाला बहुत कुछ होता है पर किसी कीमत पर....शायद में, मेरे सवाल, मेरा सच और कभी न पूरी हो पाने वाली मेरी वो कविता.......उसी कलम से
Tuesday, 28 June 2011
kallam toot gayi, syaahi sookh gayi, phir kaagaz bhi geela ho gaya...
aur hum pe ye ilzaam aa gaya
ke humne woh dastaan nahi likhi...!!!!
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