वो अभी भी बैठा है
ठीक तुम्हारे पीछे
लार टपक रही है
पेट भरा है पर शायद आँख नहीं
पिछली शाम उसकी हड्डी
शाही हड्डी जिसपर वो कई दिनों से अपना काम चला रहा था
ख़तम हो गयी है
महंगा खरीदा था , पर अब रिवाज़ चला गया,
तो उसे घर से निकाल दिया
पिछली शाम उसकी हड्डी
शाही हड्डी जिसपर वो कई दिनों से अपना काम चला रहा था
ख़तम हो गयी है
महंगा खरीदा था , पर अब रिवाज़ चला गया,
तो उसे घर से निकाल दिया
जब से आवारा हुआ है
किसी न किसी की रोटी पे नज़र रहती है उसकी
..... रोटी के लिए मशक्कत करने का आदि नहीं है
और शेहरी कुत्ते समझदार भी होते हैं
दिन भर शेर की तरह, चौड़े होकर खड़े रहते हैं
भौंकते नहीं हैं, सिर्फ गुरर्राते हैं
दिन भर शेर की तरह, चौड़े होकर खड़े रहते हैं
भौंकते नहीं हैं, सिर्फ गुरर्राते हैं
अकड़ सिर्फ इंसानों की ही जागीर नहीं होति….रात होते ही किसी भी नौकर के पाँव चाटते हैं
कुत्ते हैं, जिसके हाथ में हड्डी वही मालिक
और अब तो गले में चमकदार पट्टा भी न रहा
तोह देखने वाला हर कोई आवारा समझता है
फेंकी हुई ब्रेड रोटी सब रात में खाता हैं
और दिन भर एक ही काम करता हैं
किसी ऐसे कुत्ते की तलाश, जिसके पास कोई मज्जेदार हड्डी हो
पर अब की बार एक फ़क़ीर के ठीक पीछे बैठा है
नज़र उसके थैले पे है, बस दिन ढलने का इंतज़ार कर रहा है
पर उसे मालूम नहीं के पीछे की बजाये वोह अगर आगे बैठे
तोह फ़क़ीर खुद ही पोटली खोल के उसके आगे रख देगा
पर कोई नहीं, एक तो कुत्ता है, ऊपर से शेहरी,
इतनी नासमझी तोह जायज़ है
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