तुम अभी तक मुस्कुराना नहीं भूले
अब वो घोंसला नहीं रहा, वो परिंदा नही रहा।
तुम अभी भी हक़ जताना नही भूले
अब वो शाख़ नहीं रही, वो पेड़ नहीं रहा।
अभी तक ख्यालों को हकीकत के कपड़े पहना रक्खे हैं
अब वो रंग नहीं रहे, वो केनवस नहीं रहा।
खुश-मिजाज़ी से तकलीफ का इज़हार ही सियासत है
तुम्हे हमपर यकीं न रहा, हमे तुमपर यकीं न रहा।
तुम अभी भी हक़ जताना नही भूले
अब वो शाख़ नहीं रही, वो पेड़ नहीं रहा।
अभी तक ख्यालों को हकीकत के कपड़े पहना रक्खे हैं
अब वो रंग नहीं रहे, वो केनवस नहीं रहा।
खुश-मिजाज़ी से तकलीफ का इज़हार ही सियासत है
तुम्हे हमपर यकीं न रहा, हमे तुमपर यकीं न रहा।
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