आज उसका चेहरा याद आगया
जिसने इक रोज़ मेरी कवितायें
यह कह कर लौटा दी थीं
जिसने इक रोज़ मेरी कवितायें
यह कह कर लौटा दी थीं
के तुम्हारे पास शब्दों की कमी है
ख्याल उलझे हुए हैं
आज अपनी बड़ी सी इक तस्वीर
उसके घर के बाहर टांग आया हूँ
ख्याल उलझे हुए हैं
आज अपनी बड़ी सी इक तस्वीर
उसके घर के बाहर टांग आया हूँ
जिसपर मोटे मोटे अक्षरों में लिखा है
आज का अखबार न पढ़ना !!
आज का अखबार न पढ़ना !!
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