ज़िन्दगी तुझमे भी लोग अब ख़ास और ताज़ा ढूँढ़ते हैं
समझदार हैं, अँधेरे में रंग काला ढूँढते हैं
तकलीफ़ को जहन्नुम करार देते हैं
मुसीबतों में पहाड़ ढूँढते हैं
आप ग़लत फ़हमी में जीते हैं
ग़लत अंदाज़े रखते हैं
दीवार में अगर दरार आये, कोट कचहरी करते हैं
यह खंडरों का सौदा करते हैं
कबरों का मुआवजा ढूँढ़ते हैं।
अब किसी की नासमझी पे कोई कितनी बार तंज़ करे
समझदार हैं, अँधेरे में रंग काला ढूँढते हैं
तकलीफ़ को जहन्नुम करार देते हैं
मुसीबतों में पहाड़ ढूँढते हैं
आप ग़लत फ़हमी में जीते हैं
ग़लत अंदाज़े रखते हैं
दीवार में अगर दरार आये, कोट कचहरी करते हैं
यह खंडरों का सौदा करते हैं
कबरों का मुआवजा ढूँढ़ते हैं।
अब किसी की नासमझी पे कोई कितनी बार तंज़ करे
जिनके आँगन में सूरज रहता है
वोह जुगनुओं को ढूँढ़ते हैं
तू सबके अन्दर रहती है
चारो तरफ तो दिखती है
वोह फिर भी समझ नहीं पाते हैं
जो किताबों में तुझको ढूँढ़ते हैं
वोह जुगनुओं को ढूँढ़ते हैं
तू सबके अन्दर रहती है
चारो तरफ तो दिखती है
वोह फिर भी समझ नहीं पाते हैं
जो किताबों में तुझको ढूँढ़ते हैं
ज़िन्दगी तुझमे भी लोग अब ख़ास और ताज़ा ढूँढ़ते हैं
समझदार हैं, अँधेरे में रंग काला ढूँढते हैं
समझदार हैं, अँधेरे में रंग काला ढूँढते हैं
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