कचहरी यहाँ कोई नहीं है, सवाल हैं मगर
वकील भी नहीं हैं पर, दलील है मगर
दुश्मनी नहीं है कोई, इलज़ाम हैं मगर
सजा देना रिवाज़ नहीं, गुनाहगार है मगर
वकील भी नहीं हैं पर, दलील है मगर
दुश्मनी नहीं है कोई, इलज़ाम हैं मगर
सजा देना रिवाज़ नहीं, गुनाहगार है मगर
कटघरे में खड़ा है जो, वही तुम्हारा मुजरिम है
दोस्त है तो क्या हुआ, कातिल है मगर
जिंदा रखनी है दोस्ती तो
इन्साफ की फरयाद न कर
कचहरी यहाँ कोई नहीं है, बस सवाल हैं मगर !!
बजुर्ग और तख्ती
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