सपने देखने और उनके मुक्कमल होने के बीच का रास्ता....सवाल और उनका जवाब मिलने के दरमयां ख़ामोशी के वो दो पल, सच और झूठ के बीच कभी न मिटने वाला फासला.....न होने वाला बहुत कुछ होता है पर किसी कीमत पर....शायद में, मेरे सवाल, मेरा सच और कभी न पूरी हो पाने वाली मेरी वो कविता.......उसी कलम से
Sunday, 26 June 2011
mere ghar ko mehal kehne walon..
mere ghar mein jhaank ke dekho..
mere ghar ka har shaks...
har deewar ko pakad ke khada hai...!!!
nice.......
ReplyDeleteshukriya ...!!!
ReplyDelete