सपने देखने और उनके मुक्कमल होने के बीच का रास्ता....सवाल और उनका जवाब मिलने के दरमयां ख़ामोशी के वो दो पल, सच और झूठ के बीच कभी न मिटने वाला फासला.....न होने वाला बहुत कुछ होता है पर किसी कीमत पर....शायद में, मेरे सवाल, मेरा सच और कभी न पूरी हो पाने वाली मेरी वो कविता.......उसी कलम से
Tuesday, 11 September 2012
वोह नासमझ है....!!!
वोह नासमझ है ...
मुझे मारने के लिए खंजर तलाश रहा है "
उसे मालूम नहीं मैं शायर हूँ ...
वोह मुझसे कलम छीन लेगा ...
मैं तो युहीं मर जाऊंगा ....!!!!
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