इतना धुआं न कर के
खुद पे अफ़सोस हो
चले जब वहां से खंजर।
इतनी दुआ न कर के
दुआ ही करता रह जाये।
किसी की चीख सुन रहा है
किसी की सांस बंद ना कर।
दीवाना है आजादी का
तो दीवानगी ही कर
पेड़ से बांधकर,
शिकार फिर न कर।
गले मिलता है
तो धीरे से मिल ज़रा "
माना के जुनूं है
किसी की सांस बंद न कर।
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