सपने देखने और उनके मुक्कमल होने के बीच का रास्ता....सवाल और उनका जवाब मिलने के दरमयां ख़ामोशी के वो दो पल, सच और झूठ के बीच कभी न मिटने वाला फासला.....न होने वाला बहुत कुछ होता है पर किसी कीमत पर....शायद में, मेरे सवाल, मेरा सच और कभी न पूरी हो पाने वाली मेरी वो कविता.......उसी कलम से
Monday, 31 December 2012
शिकायत करना ज़रुरत हो गया है,और शायरी आदत।
जब जब ज़रुरत पड़ती है, मैं आदत से मजबूर हो जाता हूँ।
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