मेरे हाथ की लकीरें
इस बस्ती की सड़कों से लम्बी हो चली हैं ..
लगता है किसी बड़े शहर को
सलाम कहने का वक़्त आ गया है।
और
सलाम कहने का वक़्त आ गया है।
और
शहर बड़ा होगा तो चुनौतियां भी बड़ी होंगी ..
लगता है बड़ी बड़ी रंजिशों से आँखें चार करने का
वक़्त आ गया है।
लगता है बड़ी बड़ी रंजिशों से आँखें चार करने का
वक़्त आ गया है।
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