Wednesday, 16 January 2013

यह न देख...!!

चलो थोडा कल में झांकते हैं
आगे चलना तोह  होगा ही
जो नज़रअंदाज़ हो गया
उसे भी पहचानते हैं "

यह न देख के उस नाव में
कितने सुराख थे।
यह देख के वोह
कितने मील चल गयी
चलो अपने दुश्मन को
उसकी सूरत से नहीं
उसकी ताकत से आंकते हैं।
तेरा घर छोड़ने का मुझे
कोई अफ़सोस नहीं है
मैं आज उस मुकाम पे हूँ ,
के जिस गली कूचे से गुज़रता हूँ
लोग खिड़की खोल
परदे उठा के झांकते हैं !!

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