Wednesday, 16 October 2013

पैसा समझता, तो सब कुछ होता!!!

शब्दों से जीत न सके 
रंग पे आगये, 
पैसे की फितरत होती है 
गरीबी से दोस्ती नहीं करता 
मज़ाक करता है 
सौदा करता है। 
अच्छा हुआ, 
तुम अपने असल पे उतर आये 
मुफलिसी की फितरत है ऐतबार करना 
खरीदने की बात नहीं करती 
दोस्ती करना जानती है,
खुश रहती है
मुफलिसी चालाक हो जाती है
खज़ाने की हिफाज़त का
वक़्त आजाता है
अशर्फियाँ खायी नहीं जाती
पैसा समझता
तो सब कुछ होता!!!

मुफलिसी : poverty
अशर्फियाँ : Currency/money

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