कभी इस घर में कभी उस घर में
इक अरसे से यही हिसाब चल रहा है
ख्याल है की कोई ठिकाना मिल जाए
अदली बदली तो रुक ही जायेगी
बड़ा मुश्किल है
तय्य करना किस घर में कितना सुकून हैं
अब भटकने में मज़ा भी नहीं रहा
किस घर में रहूँ किसे छोडू बड़ी दुविधा है
फ़िर सोचता हूँ
कोई घर खुद ही आके सलाह देदे के
क्या अच्छा है, किस्मे कितना सुकून हैं।
......................................................
बाकी घर तोह सब एक जैसे होते हैं।
इक अरसे से यही हिसाब चल रहा है
ख्याल है की कोई ठिकाना मिल जाए
अदली बदली तो रुक ही जायेगी
बड़ा मुश्किल है
तय्य करना किस घर में कितना सुकून हैं
अब भटकने में मज़ा भी नहीं रहा
किस घर में रहूँ किसे छोडू बड़ी दुविधा है
फ़िर सोचता हूँ
कोई घर खुद ही आके सलाह देदे के
क्या अच्छा है, किस्मे कितना सुकून हैं।
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बाकी घर तोह सब एक जैसे होते हैं।
