Tuesday, 29 January 2013

घर तोह सब एक जैसे होते हैं।

कभी इस घर में कभी उस घर में 
इक अरसे से यही हिसाब चल रहा है 
ख्याल है की कोई ठिकाना मिल जाए 
अदली बदली तो रुक ही जायेगी 
बड़ा मुश्किल है
तय्य करना किस घर में कितना सुकून हैं 
अब भटकने में मज़ा भी नहीं रहा 
किस घर में रहूँ  किसे छोडू बड़ी दुविधा है 
फ़िर सोचता हूँ 
कोई घर खुद ही आके सलाह देदे के 
क्या अच्छा है, किस्मे कितना सुकून हैं। 
......................................................
बाकी घर तोह सब एक जैसे होते हैं।  

कोई बड़ी नादानी करते हैं



चल आज फिर कोशिश करते हैं 
बचपन तो वापिस मिलने से रहा 
कोई बड़ी नादानी करते हैं 
बिन धर्म जात रंग रूप उम्र 
जहां दिल फिसले वहां गिरते हैं 

घुटना कोहनी या फिर दिल 
छिल जाये तो भी हस्ते हुए 
उठके फिर सीधे चलते हैं 

गलती कर समझदार संभलते
नासमझ बन चल फिर से यार
गिरने की तय्यारी करते हैं 
सँभलने में कुछ मज़ा नहीं 
बेसुद्ध होकर के चलते हैं

नाम बनाने की कोशिश में
कितना वक़्त बर्बाद  किया
नादान बन कोई गलती कर
हो बदनाम घर से निकलते हैं
बचपन तो वापस मिलने से रहा 
कोई बड़ी शरारत करते हैं "

Friday, 25 January 2013

इंतज़ार किया जा सकता है।


जब तक ख्वाहिशें जिंदा हैं 
मुलाकातें टलने दो, तारीखें बदलने दो
जब तक उसके आने
तिनका सी आस भी जिंदा है
ऐ दिल.. इंतज़ार किया जा सकता है

जब तक शिकायतें जिंदा हैं
जवाब अधूरे बैठे हैं
इलज़ाम लगाना बाकी है
सज़ा दिलाना बाकी है
इंतज़ार किया जा सकता है।

जब तक यह बच्चा जिंदा है
शरारतें करना बाकी है "
रूठना मनाना बाकी है
साथ भीगना बाकी है
फिर कभी दूर न होने का
वादा भी लेना बाकी है 

जब इतना कुछ करना बाकी है "
ऐ दिल, इंतज़ार किया जा सकता है।

Sunday, 20 January 2013

Befikri


Mere daftar ki  khidki ke theek saamne
ek bus stop hai
gaadiyan rukti hai,
sawaari ka intezaar karti,
do paanch second mein nikal leti hai..
har baar ek ajeeb si hulchul paida kar jaati hai..
mein baichain ho uthta hoon..
mere jazbaaton ko tatol ke chali jaati hai..
mein bhi apne ghar se door hoon..
mera bhi man karta hai,
bina kuch soche samjhe
gaadi pe chad jau..
chadte hi conductor se
apne shehar ka naam kahu'n"
aur phir peeche waali seat pe baithkar
itminaan se man mein koi kavita bunu,
kitna khoobsoorat khyaal hai..
har roz apne daftar ki khidki se
gaadiyon ko nikalte dekh
yahi sochta hoon,
befikri kitni badi cheez hai!!!

Wednesday, 16 January 2013

यह न देख...!!

चलो थोडा कल में झांकते हैं
आगे चलना तोह  होगा ही
जो नज़रअंदाज़ हो गया
उसे भी पहचानते हैं "

यह न देख के उस नाव में
कितने सुराख थे।
यह देख के वोह
कितने मील चल गयी
चलो अपने दुश्मन को
उसकी सूरत से नहीं
उसकी ताकत से आंकते हैं।
तेरा घर छोड़ने का मुझे
कोई अफ़सोस नहीं है
मैं आज उस मुकाम पे हूँ ,
के जिस गली कूचे से गुज़रता हूँ
लोग खिड़की खोल
परदे उठा के झांकते हैं !!

Tuesday, 15 January 2013

कुछ देर मुझसे...!





कुछ देर मुझसे कोई सवाल न करना ..
कुछ देर मुझसे कोई हिसाब न करना ..
एक क़त्ल की तफ्तीश में मशरूफ हूँ मैं  ..
तुम कहते हो ..
मेरे अन्दर जो इंसा रहता था ..
उसे मैंने मारा  है .
पर ऐ शहर........बेक़सूर हूँ मैं। 


कुछ देर ऐ दर्द, मुझे तंग न करना ..
थोड़ा सहमा हुआ हूँ, अभी बेसुद्ध हूँ ..
कुछ सोच रहा हूँ 
किसी के एहसानों का
हिसाब कर रहा हूँ ..
मैं दिल हूँ।

ऐ जज़्बात कुछ देर मुझसे दूर रहना ..
आज फैसला पढ़े लिखे, नए दौर के लोग करेंगे
ज़खम नज़र अंदाज़ करना सीख .. 
दर्द जब तक जान न लेले, मूह न खोल 
में भी यही सीख  रहा हूँ 
मैं दिल हूँ।

उस ज़माने की याद है, ऐ दोस्त 
चप्पल पहनना भूल गए थे 
उसे गाड़ी चढ़ाने जब आये थे। 
कोई ख़त तो उसने लिखा न था .. 
उसकी अलमारी से उसकी कमीज़ चुरा ले आये थे।
कितने झूठ  बोले थे हमने .. 
मज़ाक बन रह गए थे हम। 
और बार बार आइना देखने की वो आदत
....तौबा ...
पर नजाने कैसा भटका हूँ
एक अरसे से इसी उलझन में हूँ, 
मैं ....... जुनूं हूँ।

पर ऐ दोस्त
गलती से भी इस बात का 
किसी से ज़िक्र न करना 
फैसला शहर ने करना है
यहाँ प्यार शर्तों पे किया जाता है
दिल और दिमाग में
कोई फर्क नहीं होता।।
और
ख़ूबसूरती माने ...सिर्फ छोटा कपड़ा ...
मैं भी यही समझ रहा हूँ
मैं इल्म हूँ।


Tuesday, 1 January 2013

मेरे हाथ की लकीरें
 इस बस्ती की सड़कों से लम्बी हो चली हैं ..
लगता है किसी बड़े शहर को 
सलाम कहने का वक़्त आ गया है।
और 
शहर बड़ा होगा तो चुनौतियां भी बड़ी होंगी ..
लगता है बड़ी बड़ी रंजिशों से आँखें चार करने का
वक़्त आ गया है।